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नौ मुखी रुद्राक्ष (9 Mukhi Rudraksha) को साक्षात मां दुर्गा (नवदुर्गा) का स्वरूप माना जाता है। इसके अधिपति देव नौ रूप वाली माता दुर्गा हैं और इसका स्वामी ग्रह केतु (Ketu) है। यह शक्ति, साहस और निडरता का प्रतीक है। ## नौ मुखी रुद्राक्ष के प्रमुख लाभ * केतु दोष से मुक्ति: यह केतु के नकारात्मक प्रभावों, जैसे मानसिक भ्रम, अज्ञात भय और अचानक आने वाली बाधाओं को शांत करने में अत्यंत प्रभावशाली है। * शक्ति और निडरता: इसे धारण करने से व्यक्ति के भीतर से डर खत्म होता है और आत्मविश्वास व मानसिक शक्ति (Willpower) बढ़ती है। * नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा: मां दुर्गा की शक्ति होने के कारण यह बुरी नजर, जादू-टोना और नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा प्रदान करता है। * पापों का नाश: शास्त्रों के अनुसार, इसे धारण करने से ब्रह्महत्या जैसे घोर पापों से भी मुक्ति मिलती है। * सफलता: यह व्यक्ति को समाज में मान-सम्मान, प्रतिष्ठा और विजय दिलाने में सहायक है। ## धारण करने की विधि और नियम * शुभ दिन: इसे धारण करने के लिए शनिवार (Saturday) या नवरात्रि के दौरान किसी भी दिन पहनना सबसे उत्तम है। * मंत्र: धारण करते समय "ॐ ह्रीं हुं नमः" (Om Hreem Hum Namah) या "ॐ दुं दुर्गायै नमः" का 108 बार जाप करें। * किसे पहनना चाहिए: जो लोग केतु की महादशा या अंतर्दशा से गुजर रहे हैं या जो बहुत जल्दी डर जाते हैं, उन्हें इसे अवश्य पहनना चाहिए। * शुद्धिकरण: इसे गंगाजल और कच्चे दूध से शुद्ध करके लाल धागे या सोने/चांदी में धारण करें। ## असली की पहचान * इसमें ऊपर से नीचे तक नौ स्पष्ट प्राकृतिक रेखाएं (धारियां) होती हैं। * असली रुद्राक्ष को गर्म पानी में उबालने पर वह अपना रंग नहीं छोड़ता और न ही उसकी धारियां मिटती हैं। क्या आप इसे केतु की शांति के लिए पहनना चाहते हैं या सुरक्षा (Protection) के लिए?